गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है : जानें कैसे ??

Submitted by Shanidham Gaushala on 26 Sep, 2026

गाय की पूरी शारीरिक संरचना विज्ञान पर आधारित है। गाय से उत्सर्जित एक-एक पदार्थ में ब्रह्म उर्जा , विष्णु उर्जा और शिव उर्जा भरी हुई है। गाय को आप कितने ही प्रदूषित वातावरण में रख दीजिये या कितना ही प्रदूषित जल या भोजन करा दीजिये गाय उस जहर रूपी प्रदूषण को दूध , दही , गोबर , गौ-मूत्र , या साँस के रूप में कभी बाहर नहीं उत्सर्जित करती है


Read More 3,751 reads

आदर्श गौशाला एवं गौपालन विधि

Submitted by Shanidham Gaushala on 26 Sep, 2026

गौशाला को हमारे शास्त्रों में देवमंदिर का दर्जा दिया गया है। जिस प्रकार देवमंदिर में देवताओं व देवियों की पूजा होती है, गौशालाओं में सर्वदेवमयी गौमाता की सेवा की जाती है। वेदों में भी गाय को देवी लक्ष्मी का प्रतिरूप कहा गया है।


Read More 4,448 reads

सर्वोपरि धर्म है गौ सेवा

Submitted by Shanidham Gaushala on 26 Sep, 2026

धर्म प्राण भारत में एक ऐसा भी स्वर्णिम युग था जब घर-घर में गौमाता की पूजा-आरती हुआ करती थी। अखिल ब्रह्माण्ड नामक परब्रह्म परमात्मा भी भगवान राम-कृष्ण के रूप में अवतार लेकर अपने हाथों से गौमाता की सेवा-शूश्रुषा किया करते थे। गौमाता भगवान श्री कृष्ण की पूज्या और इष्ट देवी रही है।


Read More 5,171 reads

गौमाता की दिव्य महिमा

Submitted by Shanidham Gaushala on 26 Sep, 2026

प्राणी विज्ञान में स्पष्ट किया गया है कि गुरदों द्वारा रक्त का शोधन व छानने की प्रक्रिया संपन्न होती है और अवशिष्ट अंश मूत्रा के रूप में बाहर निलकता है। दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि मूत्रा गुर्दे द्वारा छना हुआ रक्त का अंश होता है। चूंकि रक्त में प्राण-शक्ति निहित है, उसमें स्वर्ण-क्षार, ताम्र अंश एवं लौह अंश का सम्मिश्रण होता है।


Read More 4,253 reads

भारतीय संस्कृति एवं गौमाता

Submitted by Shanidham Gaushala on 26 Sep, 2026

भारतीय संस्कृति का विस्तार असीम है। विश्व में भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है जिसमें मानव मात्रा ही नहीं, सृष्टि की सारी वस्तुओं को पूजनीय व नमस्कृत्य माना गया है। वेदों में इसका विस्तृत वर्णन है। शुक्ल यजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के पंचम व अष्टम अध्याय व अन्य ग्रंथों में भी इसके प्रमाण भरे पड़े हैं।


Read More 3,707 reads