आओ मिलकर एक सुनहरा भारत बनाएं गौरी (बेटी), गाय और गंगा को बचाएं
शुद्ध देसी गिर गाय का घी - 500 ग्राम
शुद्ध गौमूत्र अर्क - 500 मि.ली.
देसी गाय के गोबर से बनी धूप एवं उपले
दाती महाराज के 77 वां जन्मोत्सव एवं 30 वां दाती कन्या भ्रूण सरंक्षण दिवस पर संतों की गौ-महाकुंभ, गौ-संवर्धन, दाती कन्या भ्रूण संरक्षण और इष्ट-पूजा के जनजागरण का हजारों साधू-संतो लिया संकल्प श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा ने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और गौ-संरक्षण अभियान के लिए दिए 5.11 लाख, देशभर से जुटे हजारों संतों ने समाज जागरण का किया आह्वान
नई दिल्ली। गोपाष्टमी का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह त्योहार मुख्य रूप से गौ माता और भगवान कृष्ण के प्रति श्रद्धा और भक्ति को समर्पित है। गोपाष्टमी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन गौ माता और भगवान कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि यह दिन भगवान कृष्ण द्वारा गौ चराने की शुरुआत की गई थी। इस अवसर पर शनिवार को सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम में धूमधाम –असोला, फतेहपुर बेरी स्थित शनिधाम गौशाला में गोपाष्टमी का धूमधाम से इस महापर्व को मनाया गया।
Submitted by Shanidham Gaushala on 19 Dec, 2022
घाणेराव 17 नवबर। स्थानीय कस्बे में श्री शनिदेव सेवा समिति घाणेराव के तत्वाधान में आयोजित स्वामी परमहंस निजस्वरूपानंद दाती महाराज के सानिध्य में श्री गौ सेवा रत्न सम्मान समारोह ओर कंबल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें 225 लंपि वॉरियस को गौ सेवा रत्न से समानित किया गया।
Submitted by Shanidham Gaushala on 09 May, 2019
मानव-जाति के लिए गौ से बढ़कर उपकार करने वाली और कोई वस्तु नहीं है। गौ मानव जाति की माता के समान उपकार करने वाली, दीर्घायु और निरोगता देने वाली है। यह अनेक प्रकार से प्राणिमात्र की सेवा कर उन्हें सुख पहुँचाती है। इसके उपकार से मनुष्य कभी उऋण नहीं हो सकता। यही कारण है कि हिन्दू जाति ने गाय को देवता और माता के सदृश्य समझ कर उसकी सेवा-शुश्रूषा करना अपना प्रधान धर्म समझा है। गाय का महत्व प्रतिपादन करने वाले कुछ वेद मन्त्र और शास्त्र वचन नीचे उपस्थित करते हैं।
Submitted by Shanidham Gaushala on 07 Jul, 2019
3 . साहीवाल भारत की यह सर्वश्रेष्ठ प्रजाति सहीवाल मुख्यतः पंजाव प्रांत में पायी जाती है। इस नस्ल की गायें पाकिस्तान में भी होती हैं तथा अफगानिस्तान की गायों से मिलती-जुलती हैं। मान्यता के अनुसार ये गीर नस्ल की मिश्रित अधिक दूध देने वाली गायें हैं। अच्छी देखभाल से इनको कहीं भी रखा जा सकता है। इन्हें बड़ी-बड़ी डेयरियों में पाली जाती हैं। सामान्यतः लालीपन लिए हुए भूरे रंग की इन गायों के कान ओर सिंगें नीचे की ओर झुकी होती हैं। इस प्रजाति के बैल के ललाट चौड़े मगर गाय के ललाट मध्यम आकार की होती हैं। थुथन काली और पूंछ सामान्य लंबाई के होने के साथ-साथ इन्हें भारी गलकंब की वजह से भी पहचानी जाती हैं। इनका थन भी बड़ा और भारी होता है।साहीवाल नर का वजन 450 से 500 किलो, गाय का 300-400 किलो तक होता है।
यज्ञ में सोम की चर्चा है जो कपिला गाय के दूध से ही तैयार किया जाता था। इसीलिए महाभारत के अनुशासन पर्व में गौमाता के विषय में विशेष चर्चाऐं हैं। गाय सभी प्राणियों में प्रतिष्ठत है, गाय महान उपास्य है। गाय स्वयं लक्ष्मी है, गायों की सेवा कभी निष्फल नहीं होती।
मित्रो! यज्ञ में प्रयुक्त होने वाले शब्द जिनसे देवताओं व पितरों को हवन सामग्री प्रदान की जाती है, वे स्वाहा व षट्कार गौमाता में स्थायी रूप से स्थित हैं। स्पष्ट है, यज्ञ स्थल गाय के गोबर से लीपकर पवित्र होता है। गाय के दूध, दही, घृत, गोमूत्र और गोबर से बने हुए पंचगव्य से स्थल को पवित्र करते हैं।
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